शब ए बरात की रात होली को लेकर सेवरही पुलिस मुस्ददा
कुशीनगर! शब ए बरात 7 मार्च को होली से एक दिन पहले पडने वाले इस त्योहार को लेकर सेवरही थानाप्रभारी संजय कुमार सेवरही कस्बा चौकी इंचार्ज मंगेश मिश्रा व पूरी पुलिस टीम तैयारीयो मे जूटा हुआ है शब ए बरात 7 मार्च और होली 8 मार्च दोनो एक साथ होने से पुलिस की मुस्तैदी पहले दी गई है अराजक तत्वों पर नजर रखी जा रही है सेवरही थानाप्रभारी संजय कुमार और कस्बा चौकी प्रभार मंगेश मिश्रा अपनी निगरानी में जगह दें सफाई कर्मचारियों को सफाई के लिए सफाई के लिए हिदायत दे रहे हैं और सेवर थाना कुछ गावो के संभ्रांत लोगो से ग्राम प्रधानो और नगर के जनप्रतिनिधियों से मिलने का क्रम जारी है होली की प्रतिक्रिया के दौरान कोई घटना न हो इसके लिए नगर के प्रत्येक वार्डो मे चौकी प्रभार मंगेश मिश्रा अपने हमराहीयो के साथ वार्ड के नि चलित भुत और भविष्य के वार्ड सदस्यों के सहयोग से मुहल्ले के संभ्रांत लोगों के साथ बैठक की जा रही है
शब-ए-बारात मुस्लिम समुदाय के प्रमुख पर्वों में से एक है। यह इबादत की रात होती है। इस साल देश भर में शब-ए-बारात का त्योहार 7 मार्च को मनाया जाएगा। यह त्योहार चांद के दिखावे पर अटूट होता है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार शब-ए-बारात शाबान महीने की 15वीं तारीख की रात को मनाई जाती है। इस्लाम धर्म में माह-ए-शाबान को बहुत ही यादगार महीना माना जाता है। यह दीन-ए-इस्लाम का आठवां महीना है। कहा जाता है कि शब-ए-बारात में इबादत करने वाले लोगों के सारे आरोप माफ हो जाते हैं। इसलिए लोग शब-ए-बारात में लोग रात भर जागकर अल्लाह की इबादत करते हैं और उनसे अपने बहाने की मजाक मांगते हैं। शब-ए-बारात…
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार शब-ए-बारात की रात हर साल एक बार शाबान की 14 तारीख को सूरज के बाद शुरू होती है। शब-ए-बारात का अर्थ है शब यानी रात और बारात यानी भारी होना। शब-ए-बारात के दिन इस दुनिया को छलांगों की कब्रों पर उनके प्रियजनों को रोशन किया जाता है और दुआएं फैलाई जाती हैं। मान्यता के अनुसार इस रात को अपने चाहने वालों को होश-किताब रखने के लिए आते हैं। इस दिन जो भी मिला-जुला मन से अल्लाह से अपने बहाने के लिए जोक मांगते हैं। ऐसा करने से अल्लाह उनके लिए जन्नत के दरवाजे खोल देते हैं।
शब-ए-बारात के अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोग मस्जिदों और कब्रिस्तानों में अपने और महत्वाकांक्षी के लिए खुद से इबादत करते हैं। घरों को विशेष रूप से देखा जाता है। मस्जिद में नमाज पढ़कर अल्लाह से अपने गुनाहों का जोड़ा जाता है। इस दिन घरों में हलवा, बिरयानी, कोरमा मिठा के कई तरह के व्यंजनादि बनाए जाते हैं। उसी समय इबादत के बाद यह भ्रांति में जुड़ा हुआ है।
इस दिन मस्जिदों और कब्रिस्तानों में खास तरह की सजावट की जाती है। कब्रों पर चिराग जलाकर उनके लिए मगफिरत की दुआएं दी जाती हैं। इस्लाम में इसे चार मुकद्दस रातों में से एक माना जाता है, जिसमें पहली आशूरा की रात, दूसरी शब-ए-मेराज, तीसरी शब-ए-बारात और चौथी शब-ए-कद्र है।


