शब-ए-बारात में मगफिरत की मांगी जाती है दुआ, रईस अहमद अंसारी

शब-ए-बारात में मगफिरत की मांगी जाती है दुआ, रईस अहमद अंसारी

लखनऊ :-लखनऊ से बड़ी खबर समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय सचिव रईस अहमद अंसारी से हिंदी दैनिक अखबार सोशल मीडिया टाइम्स के संपादक एबारत अली अन्सारी ने प्रेस वार्ता की उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय के प्रमुख पर्वों में से एक है। यह इबादत की रात होती है। इस साल देश भर में शब-ए-बारात का त्योहार 3 फरवरी को मनाया जाएगा। यह त्योहार चांद के दिखने पर निर्भर होता है इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार शब-ए-बरात शाबान महीने की (15)वीं तारीख की रात को मनाई जाती है। इस्लाम धर्म में माह-ए-शाबान बहुत मुबारक महीना माना जाता है। यह दीन-ए-इस्लाम का आठवां महीना होता है। कहा जाता है कि शब-ए-बारात में इबादत करने वाले लोगों के सारे गुनाह माफ हो जाते हैं। इसलिए लोग शब-ए-बारात में रात भर जागकर अल्लाह की इबादत करते हैं और उनसे अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। शब-ए-बारात इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, शब-ए-बारात की रात हर साल में एक बार शाबान महीने की 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद शुरू होती है। शब-ए-बारात का अर्थ है शब यानी रात और बारात यानी बरी होना। शब-ए-बारात के दिन इस दुनिया को छोड़कर जा चुके पूर्वजों की कब्रों पर उनके प्रियजनों द्वारा रोशनी की जाती है और दुआ मांगी जाती है उस रात में जो भी सच्चे मन से अल्लाह से अपने माफी मांगते गुनाहों के लिए हैं। ऐसा करने से अल्लाह उनके लिए जन्नत के दरवाजे खोल देता है। शब-ए-बारात के अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोग मस्जिदों और कब्रिस्तानों में जाकर अपने और पूर्वजों के लिए खुदा से दुआकरते हैं। घरों को विशेष रूप से सजाया जाता है। मस्जिद में नमाज पढ़कर अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगी जाती है। इस दिन घरों में पकवान जैसे हलवा, बिरयानी, कोरमा मिठा के कई तरह के पकवान आदि बनाया जाता है। वहीं इबादत के बाद इससे गरीबों में बांटा जाता है इस दिन मस्जिदों और कब्रिस्तानों में खास तरह की सजावट की जाती है कब्रों पर चिराग जलाकर उनके लिए मगफिरत की दुआएं मांगी जाती है इस्लाम में खासकर चार मुकद्दस रातों में से एक माना जाता है जिसमें पहले असुरा की रात दूसरी शब-ए-मिराज तीसरी शब-ए-बारात और चौथी शब-ए-कद्र होती है।

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