कलम हथियार है, दलाली का जरिया नहीं
महराजगंज:-पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। लेकिन आज कुछ लोग इस पवित्र पेशे को बदनाम कर रहे हैं।पत्रकार वो होता है जो कलम को हथियार बनाकर जनता की आवाज उठाता है। जो सत्ता और व्यवस्था के सामने भी सच लिखने की हिम्मत रखता है।लेकिन आज थानों की कुर्सियों पर बैठकर सेटिंग-सौदेबाजी करने वाले, हर मामले में डील कराने वाले और गले में माइक लटका कर खुद को पत्रकार बताने वाले लोग सिर्फ दलाली का नया नाम खोज रहे हैं।याद रखिए, खबर बेचकर कमाया पैसा जेब भर सकता है, लेकिन पत्रकारिता की इज्जत वापस नहीं ला सकता*। जिस दिन कलम बिकने लगेगी, समझ जाइए पत्रकारिता मरने लगेगी।


