Friday, April 10, 2026
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पिता का सेवा न करना एक पुत्र पर भारी पड़ा, भूमि में बराबरी की हिस्सेदार बनी बड़ी बहु

पिता का सेवा न करना एक पुत्र पर भारी पड़ा, भूमि में बराबरी की हिस्सेदार बनी बड़ी बहु

सुनील दत्त शर्मा की रिपोर्ट

खड्डा, कुशीनगर। थाना जटहा बाजार के ग्राम सभा पडरही उर्फ पकड़ी निवासी ने बुज़ुर्गी में बड़ी पुत्र बहु के सेवा करने पर अपने संम्पत्ति में बराबरी का हिस्सेदार बना दिया। जिसको सुप्रीम कोर्ट भी जायज मान छोटे भाई की अपिल को खारिज कर पुत्र बहु को बफाबरी का हिस्सा देने का आदेश दे दी है। जिस आदेश का चर्चा पूरे गांव में गर्म है।
बताते चले कि पडरही उर्फ पकड़ी निवासी वृद्धि मल्ल पुत्र छेदी मल्ल अपने दो पुत्रों में बड़े पुत्र ध्रुवनारायण को किसान तो छोटे पुत्र मिथिलेश को पढा लिखाकर सरकारी नौकरी दिला दी। छोटा पुत्र सरकारी नौकरी में व्यस्तता अधिक होने से पिता का देखभाल बड़े भाई के सापेक्ष कम करने लगा जिसको देख पिता ने अपने जायजाद में बड़ी पुत्र बहु सरोज देवी पत्नी ध्रुवनारायण मल्ल को 27 अक्टूबर 2017 को बराबरी का हिस्सेदार बना पंजीकृत वसीयतनामा लिख दी और लिखने के बाद स्वर्ग पधार दी। पिता के इस रवैये को देख छोटे पुत्र ने आहत होकर एसडीएम खड्डा का दरवाजा खटखटाया जहां 146 के कार्यवाही में गाटा संख्या 23, 66, व 364 पर जब्ती का आदेश कर भूमि पर रिसीवर तैनात कर दिया। बड़े भाई ने यह देख जिला जज के वहां अपिल की वहां भी हार का मुंह देखना पड़ा। अन्तोगत्वा बड़ा भाई ध्रुवनारायण ने पत्नी सरोज देवी की वसीयतनामा को बचाने के लिए दिनांक 20 जुलाई 2022 को हाईकोर्ट इलाहाबाद में अपिल संख्या A482 नंबर 26525 दायर कर दी। जिस कोर्ट से पिता का वसीयत जायज मानकर एक माह के अंदर उक्त भूमि पर सरोज देवी को बराबरी का हिस्सा देने का आदेश दे दिया। अभी सरोज देवी बराबरी की हिस्से पर कावीज पाती कि छोटा देवर मिथिलेश मल्ल ने सुप्रीमकोर्ट में स्पेशल अपील नंबर 7589 दायर कर दी जिसकी सुनवायी 22 अगस्त 2022 को कोर्ट नंबर 8 में जस्टिस हेमंत गुप्ता व जस्टिस जे बी पारडीवला ने सुनी जहां स्पेशल लिव को खारिज करते हाईकोर्ट का जजमेंट सही मान केस को डिस्पोजड कर दिया। यह सुन और देख पिता का वसीयत पूरे गांव में चर्चा बना हुआ है। सरोज देवी के पति ध्रुवनारायण मल्ल का कहना है कि हाईकोर्ट तथा सुप्रीमकोर्ट दोनों जगह से पिता के वसीयतनामा को सही पाया है फिर भी भूमि रिसीवर से भूमि अधिकारियों ने नही दिलाई है अब अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट ऑफ कंटेम्प्ट करने के लिए वाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

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