रामलीला का 6 वे दिन लक्ष्मण और पशुराम संवाद का मंचन
राहुल विश्वकर्मा
बेलवा कारखाना, कुशीनगर ! चौरा खास थाना क्षेत्र के कोइलसवा बुजुर्ग ( बाबू टोला ) में 11 दिवसीय रामलीला का मंचन अयोध्या धाम से चल कर आए कलाकारों द्वारा शाम 7 बजे से लेकर 11 बजे रात्रि तक किया जा रहा हैगुरुवार की शाम 7 बजे से रामलीला का 6 वे दिन लक्ष्मण और पशुराम संवाद का मंचन कलाकारों द्वारा किया गया। इस दौरान स्वयंवर में रखा धनुष को जैसे ही श्री राम जी तोड़ते हैं तीनो लोक में खुशी से पुष्प का वर्षा होने लगता है। रामलीला का उद्घाटन बतौर अतिथि के रूप में समाजसेवी उमेश मदेशिया और भाजपा नेता रामबृक्ष गिरी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर फीता काट कर किया।लीला का शुरुवात सीता के स्वंबर में रखा धनुष तोड़ने को लेकर होता है । राजा जनक अपनी पुत्री सीता के विवाह को लेकर काफी चिंतित रहते है । अपनी पुत्री सीता के विवाह को लेकर स स्वयंवर रखते हैं। देश के सारे राजा को स्वयंवर में आने के लिए नेवता भेजवाते है। स्वयंवर में एक शर्त होता है सीता से शादी वही करेगा जो धनुष को तोड़ेगा।भगवान शंकर का धनुष तोड़ने के लिए एक से बढ़कर एक के वीर योद्धा आते हैं और धनुष को तोड़ने के लिए शरीर का सारा बल लगा देते हैं फिर भी धनुष को तोड़ नहीं पाते हैं। राजा जनक सारे वीर योद्धा को हताश देखकर परेशान हो जाते हैं। और ईश्वर को कोसते हुए कहते हैं की अब हमारी सीता का विवाह का क्या होगा। तभी राजा जनक को चिंतित देखकर गुरु विश्वामित्र अपने शिष्य राम को धनुष तोड़ने के लिए आज्ञा देते हैं। गुरु का आदेश मिलते ही तुरंत भगवान श्री राम धनुष को तोड़ देते हैं और फूलों की वर्षा होने लगता है।जैसे ही धनुष टूटता है ऋषि परशुराम को धनुष टूटने की सूचना मिलती है वह क्रोधित होते हुए हाथ में कृपाल लहराते हुए पहुंचते हैं। क्रोधित मुद्रा में धनुष तोड़ने वाले को सजा देने के लिए परेशान हो जाते हैं। और भरी सभा में धनुष तोड़ने वालों को भला बुरा कहते हुए अपमानित करते हैं इस अपमान का लक्ष्मण सहन नहीं कर पाते हैं जबरदस्त दोनों के बीच संवाद होता है।इस दौरान आचार्य परमात्मा दास , रमन शाही,राजू शाही, तनु शाही, सुधीर शाही, रामबृक्ष गिरी,अनिरुद्ध मद्धेशिया, गुलाब गुप्ता, पप्पू राजभर।


