दिव्यांगजनो में नैसर्गिक रूप से होते उत्कृष्ट गुण इन्हें न मारो
सुनील दत्त शर्मा
खड्डा, कुशीनगर। थाना नेबुआ नौरंगिया के ग्राम सभा नैरंगिया नौका टोला में एक दिव्यांग बच्ची को घर के परिजनों ने नहर में दफना दिया और झूठी कहानी रचते गुमशुदगी का रपट भी दर्ज करा दी। जिसकी बाजार काफी दिनों से गर्म है। लोग तरह तरह के चर्चा करते की आखिर क्या मजबूरी थी दिव्यांग बच्ची को परिजनों ने ऐसा हरकत कर दिया।
बताते चले कि दिव्यांगजन के पास भी उतनी ही प्रतिभा और क्षमता होती है, जितनी सामान्य लोगों के पास, कभी कभी तो उनके इतनी ज्यादा प्रतिभा होती है। उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिये लोग उनके भीतर आत्मविश्वास का संचार करते है। प्रायः यह भी देखा गया है कि दिव्यांगजनो में नैसर्गिक रूप से उत्कृष्ट गुण भी होते है। जिसको देख कर देश के सामाजिक न्याय एंव सशक्तिकरण मंत्रालय के अधीन दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग हर वर्ष व्यक्तियों, संस्थानों, संगठनों, राज्यों, जिलों से दिव्यांगजनो के सशक्तिकरण के क्षेत्र में किये गये शानदार कार्यो के लिये राष्ट्रीय दिव्यांगजन सशक्तिकरण पुरस्कार भी देता है। फिर भी नौरंगिया निवासी अमिरका कुशवाहा की 10 वर्षीय दिव्यांग पुत्री 30 नवंबर की देर रात अचानक क्यो गुम हो जाती है। ग्रामीण भी सोच में पड़ जाते है कि आखिर एक दिव्यांग कहां गायब हो गयी। परिवारजनों ने भी बताने से कतराते दिखे। ऊपर से परिवारीजनों ने थाने में गुमसुदगी का रिपोर्ट भी दर्ज करा दी और पिता घर छोड़कर फरार हो गये फिर भी ग्रामीणों के गले मे दिव्यांग की अचानक गायब होना लोगो में हजम नही हो रहा था। नेबुआ नौरंगिया थाना प्रभारी अतुल कुमार श्रीवास्तव ने मामले को गहनता से जांच की तो पता चला कि दिव्यांग गुम नही हुई बल्कि उसे वास्तव में गायब कर दिया गया है। पुलिस के पूछे जाने पर अमिरका कुशवाहा ने बताया कि दिव्यांग पुत्री अचानक पानी में गिर गई और उसकी मृत्यु होने पर उसे चुपके से गांव के बगल में दफना दिया है, परिजनों के बताए जगह पर पुलिस बल के अलावा तहसील के आला अफसरों के मौजूदगी में उक्त जगह पर खुदाई हुई तो पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार दोषियों के उपर कार्यवाही करने की बात हो रही है। बुद्धिजीवी वर्ग कहता है कि दिव्यांगजन भी समाज के अहम हिस्सा है। इन्हें भी जीने के लिये सरकार तमाम योजना संचालित की है फिर भी पिता के हाथ ऐसा क्यों हो गया। कुछ लोग यह भी मानते है दिव्यांग को परिजन पूरे दस वर्षों से लालन पालन किये। मारना होता तो दिव्यांग को जन्म के समय ही मार दिये होते। इस तरह से मामला क्षेत्र में काफी गर्म है। अब मामला पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हुई है। वही समाजसेवियों का कहना है कि दिव्यांगजनो को भी सम्मान जनक तरीके से जीने का अधिकार है। माता पिता उन्हें भी जीने दे।


